वन्यजीवों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनी स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स द्वारा दर्ज अपराधों के लिए बनीं विशेष अदालतों में अब मुख्य न्यायिक दंडाधिकारियों के साथ-साथ वरिष्ठतम अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी भी प्रकरणों की सुनवाई करेंगे। हाईकोर्ट ने इस संबंध में शनिवार को अधिसूचना जारी कर प्रदेश की पांचों विशेष कोर्ट में सीजेएम के साथ वरिष्ठतम एसीजेएम को पदांकित कर दिया है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के आदेश पर रजिस्ट्रार बीपी शर्मा ने अधिसूचना जारी की है। ये विशेष अदालतें होशंगाबाद, जबलपुर, इंदौर, सागर और सतना में गठित हैं। इसके अलावा इन विशेष अदालतों का क्षेत्राधिकार भी बढ़ा दिया गया है। होशंगाबाद कोर्ट के क्षेत्राधिकार में भोपाल, बैतूल, हरदा, सीहोर, विदिशा रायसेन, आगर और राजगढ़ शामिल रहेंगे।
दरअसल, अब तक स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स द्वारा दर्ज अपराधों की ट्रायल के लिए केवल सीजेएम को ही अधिकृत किया गया था। सीजेएम का प्रमोशन या तबादला होने पर मामलों की ट्रायल प्रभावित होती थी। सूत्रों के अनुसार वन विभाग और एसटीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाईकोर्ट के अधिकारियों से मिलकर समस्या से अवगत कराया। हाईकोर्ट ने पूर्व के सभी आदेशों को अपास्त करते हुए नई अधिसूचना जारी की।
अभी लंबित है 400 आरोपियों की ट्रायल
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स भोपाल और पांच रीजनल एसटीएसएफ द्वारा दर्ज 34 मामलों की ट्रायल विशेष अदालतों में लंबित है। इन प्रकरणों में करीब 400 आरोपियों की ट्रायल चल रही है। इनमें बाघ के शिकार के अलावा विलुप्त प्रजाति के कछुआ तस्करी, वन्य जीवों के अवयवों की तस्करी से जुड़े अपराध शामिल हैं।